कोई ख्वाहिश नहीं कोई मंज़िल नहीं


कोई ख्वाहिश नहीं ,कोई मंज़िल नहीं ,
ज़िन्दगी में ऐसा ,मकाम आ गया है ।

कोई साथी नहीं ,कोई दुश्मन नहीं ,
ज़िन्दगी में ऐसा ,पड़ाव आ गया है ।

कोई अपना नहीं ,कोई पराया नहीं ,
ज़िन्दगी में ऐसा ,ज़हान आ गया है ।

कोई इरादे नहीं ,कोई वादे नहीं ,
ज़िन्दगी में ऐसा ,इम्तेहान आ गया है ।

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