ग़ज़ल – जायेगी


कीजिए फरियाद खाली जायेगी
बात कल पे आज टाली जायेगी

दूसरों में खोट ही बस खोट है
कब निगाहें खुद पे डाली जायेगी

दोस्ती है आज सबके सामने
दुश्मनी पर दिल में पाली जायेगी

वक्त गर ठोकर ही देगा हर कदम
जिंदगी कैसे सँभाली जायेगी

है गरीबी में कहाँ अब रोटियाँ
भूख आँसू पी बुझा ली जायेगी

टूटते हैं बस गरीबों के ही घर
कब हवेली तक कुदाली जायेगी

गर सियासत का चलन ऐसा रहा
बेटियाँ घर से उठा ली जायेगी

वक्त पे गर दूध शक्कर ही न हो
चाय की हाथों से प्याली जायेगी

मुफलिसी है दिल जलाकर क्या करें
बस अँधेरे में दिवाली जायेगी

वाह में तब्दील होगी तंज है
आह जो दिल से निकाली जायेगी

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